Dyarchy in Provinces क्या थी?
1919 की द्वैध शासन व्यवस्था की पूरी कहानी — Reserved, Transferred Subjects और Governor की Power
कल्पना कीजिए…
आपको किसी बड़े स्कूल की जिम्मेदारी दी गई।
Principal आपसे कहता है—
“अब तुम भी स्कूल चलाओगे।”
आप खुश हो जाते हैं।
लेकिन अगले ही पल वह कहता है—
“हाँ, लेकिन स्कूल का पैसा मैं संभालूँगा, security मैं संभालूँगा, discipline मैं संभालूँगा और सबसे महत्वपूर्ण फैसले भी मैं ही लूँगा।”
अब आप सोचेंगे—
“अगर बड़े फैसले आपके पास ही हैं, तो मुझे स्कूल चलाने की जिम्मेदारी मिली कहाँ?”
भारत में 1919 की Dyarchy कुछ ऐसी ही कहानी थी।
भारतीयों को पहली बार Provincial Government के कुछ हिस्सों की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण शक्तियों का बड़ा हिस्सा Governor और ब्रिटिश अधिकारियों के पास ही रहा।
इसी व्यवस्था को कहा गया—
Dyarchy — द्वैध शासन

1. Dyarchy का अर्थ क्या था?
सबसे पहले इस शब्द को समझते हैं।
Dyarchy का सामान्य अर्थ है—
दो लोगों या दो authorities द्वारा शासन चलाना।
1919 में इसका प्रयोग Provinces (प्रांतों) में किया गया।
Provincial Government के विषयों को दो हिस्सों में बाँट दिया गया:
🔴 Reserved Subjects
इनका control Governor और उसके Executive Council के पास रहा।
🟢 Transferred Subjects
इनकी जिम्मेदारी Indian Ministers को दी गई।
इसलिए एक ही Provincial Government में दो अलग-अलग तरीके से शासन चलने लगा।
यही था—
Dyarchy = Reserved + Transferred
🧠 एक लाइन में याद रखें
“एक Province, दो हिस्से, दो तरह का control — यही Dyarchy।”
2. Dyarchy की आवश्यकता क्यों पड़ी?
अब सवाल उठता है—
अंग्रेजों को ऐसा करने की जरूरत ही क्यों पड़ी?
इसके पीछे भारत की बदलती राजनीतिक स्थिति थी।
1909 के Morley-Minto Reforms से भारतीयों को Legislative Councils में पहले की तुलना में ज्यादा representation मिला था।
लेकिन भारतीय नेताओं की मांग अब इससे आगे निकल चुकी थी।
भारतीय पूछ रहे थे—
“सिर्फ Council में बैठने से क्या होगा? हमें प्रशासन में वास्तविक जिम्मेदारी कब मिलेगी?”
राजनीतिक जागरूकता लगातार बढ़ रही थी।
First World War के दौरान भारत ने ब्रिटिश युद्ध प्रयासों में बड़ी सहायता की। युद्ध के बाद भारतीयों को उम्मीद थी कि अब ब्रिटिश सरकार राजनीतिक सुधारों को आगे बढ़ाएगी।
इसी माहौल में 20 August 1917 को Secretary of State for India Edwin Montagu ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की।
इसमें भारत में responsible government की दिशा में धीरे-धीरे विकास की बात कही गई।
लेकिन अंग्रेज अचानक पूरी सत्ता भारतीयों को देने के लिए तैयार नहीं थे।
इसलिए एक बीच का रास्ता निकाला गया—
“कुछ जिम्मेदारी भारतीयों को दो, लेकिन महत्वपूर्ण नियंत्रण अपने पास रखो।”
यहीं से Provincial Dyarchy की शुरुआत हुई।
3. Dyarchy में Subjects को क्यों बाँटा गया?
यहाँ कहानी और interesting हो जाती है।
मान लीजिए एक Province में 10 महत्वपूर्ण काम हैं।
अगर सारे 10 काम भारतीय मंत्रियों को दे दिए जाएँ, तो उनके पास काफी power आ जाती।
अंग्रेजों को यह मंजूर नहीं था।
इसलिए उन्होंने कहा—
कुछ काम भारतीयों को देंगे।
कुछ महत्वपूर्ण काम अपने पास रखेंगे।
इस तरह Subjects को दो हिस्सों में बाँटा गया:
🔴 Reserved
🟢 Transferred
अब दोनों को एक-एक करके समझते हैं।
4. Reserved Subjects क्या थे?
Reserved Subjects वे विषय थे जिन पर Governor और उसके Executive Council का नियंत्रण था।
इन विषयों में भारतीय Ministers की भूमिका नहीं थी।
इनमें मुख्य रूप से महत्वपूर्ण और संवेदनशील प्रशासनिक क्षेत्र शामिल थे, जैसे—
- Law and Order
- Police
- Justice
- Finance
- Land Revenue
- Irrigation आदि।
इन विषयों को अंग्रेजों ने अपने नियंत्रण में रखा।
ऐसा क्यों?
क्योंकि ये वे विभाग थे जिनके माध्यम से सरकार की वास्तविक ताकत चलती थी।
सोचिए—
अगर किसी सरकार के पास:
Police नहीं है
Finance नहीं है
Law and Order नहीं है
तो उसके पास कितनी वास्तविक power बचेगी?
यही Dyarchy की सबसे बड़ी कमजोरी थी।
🧠 Trick
Reserved = अंग्रेजों ने अपने पास Reserve रखा।
5. Transferred Subjects क्या थे?
अब दूसरी तरफ थे—
Transferred Subjects
इन विषयों की जिम्मेदारी Indian Ministers को दी गई।
इनमें ऐसे विषय शामिल थे जिनमें भारतीयों को प्रशासन चलाने का अनुभव दिया जा सकता था।
मुख्य उदाहरण:
- Education
- Agriculture
- Public Health
- Local Self-Government
- Cooperative Societies आदि।
अब भारतीय मंत्री इन क्षेत्रों में policies और administration से जुड़े काम कर सकते थे।
यानी पहली बार भारतीयों को यह अनुभव मिलने लगा कि—
“सरकार में सिर्फ बैठना नहीं, कुछ काम की जिम्मेदारी भी संभालना है।”
यही 1919 Dyarchy का सकारात्मक पक्ष था।
🧠 Trick
Transferred = जिम्मेदारी भारतीय Ministers को Transfer की गई।
6. Reserved और Transferred को एक उदाहरण से समझिए
मान लीजिए एक गाँव की पूरी व्यवस्था दो हिस्सों में बाँट दी गई।
अंग्रेज अधिकारी कहता है—
“Police और Law and Order मैं संभालूँगा।”
भारतीय मंत्री पूछता है—
“और हमारे पास क्या रहेगा?”
अंग्रेज अधिकारी कहता है—
“Education, Agriculture और Health तुम संभालो।”
भारतीय मंत्री खुश हो जाता है।
वह सोचता है—
“अब मैं भी लोगों के लिए काम कर सकता हूँ।”
लेकिन कुछ समय बाद उसे पता चलता है—
Education के लिए पैसा चाहिए।
पैसा किसके पास है?
👉 Finance — Reserved
School में security की जरूरत है।
Police किसके पास है?
👉 Police — Reserved
किसी बड़े administrative dispute को संभालना है।
Justice किसके पास है?
👉 Justice — Reserved
अब भारतीय मंत्री के सामने समस्या आती है—
“जिन कामों की जिम्मेदारी मुझे दी गई है, उन्हें अच्छी तरह करने के लिए जरूरी ताकत का कुछ हिस्सा तो किसी और के पास है।”
यही Dyarchy की practical difficulty थी।
7. Governor की भूमिका क्या थी?
अब आते हैं इस व्यवस्था के सबसे powerful व्यक्ति पर—
Governor
Provincial Dyarchy में Governor की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण थी।
Governor के पास Reserved side पर सीधा control था।
वह अपने Executive Council की मदद से Reserved Subjects को संभालता था।
इसलिए:
Reserved Subjects → Governor + Executive Council
लेकिन Governor की भूमिका सिर्फ Reserved Subjects तक सीमित नहीं थी।
उसके पास कई महत्वपूर्ण constitutional और administrative powers भी थीं।
इसका मतलब यह था कि भारतीय Ministers को जिम्मेदारी मिलने के बावजूद Governor के पास काफी मजबूत position बनी रही।
आसान भाषा में:
भारतीय मंत्री कह सकता था—
“मैं अपने department में यह policy लागू करना चाहता हूँ।”
लेकिन Governor और Provincial constitutional structure के कारण उसकी स्वतंत्रता पूरी नहीं थी।
इसलिए Dyarchy में Governor को सबसे महत्वपूर्ण controlling authority के रूप में समझना चाहिए।
8. Indian Ministers की भूमिका क्या थी?
अब उस भारतीय मंत्री को देखिए जिसे पहली बार कुछ वास्तविक administrative responsibility मिली।
Indian Ministers को Transferred Subjects दिए गए।
वे अपने departments में:
- policies पर काम कर सकते थे,
- administration चला सकते थे,
- जनता से जुड़े मुद्दों पर काम कर सकते थे,
- Provincial Legislature के माध्यम से अपने काम के लिए समर्थन लेने की कोशिश कर सकते थे।
सबसे महत्वपूर्ण बात—
वे अपने Transferred Subjects के लिए Legislature के प्रति कुछ हद तक responsible थे।
यानी भारतीयों को पहली बार यह अनुभव मिलने लगा कि—
“जनता और Legislature के सामने जवाब देना भी शासन का हिस्सा है।”
यह आगे चलकर responsible government की दिशा में एक महत्वपूर्ण training ground बना।
लेकिन उनकी power पूर्ण नहीं थी।
यही कारण है कि भारतीय नेताओं ने Dyarchy को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया।
9. Dyarchy की सबसे बड़ी समस्या क्या थी?
अब जरा उस भारतीय मंत्री की स्थिति सोचिए।
उसके पास Education है।
लेकिन Finance किसी और के पास है।
उसके पास Agriculture है।
लेकिन सरकार के कई महत्वपूर्ण resources पर उसका पूरा control नहीं है।
उसके पास Public Health है।
लेकिन प्रशासन की दूसरी शक्तियाँ उसके हाथ में नहीं हैं।
अब अगर वह जनता से कहे—
“मैं आपके लिए बहुत अच्छा काम करूंगा।”
तो जनता पूछ सकती है—
“लेकिन आपके पास उसके लिए पूरी power और resources हैं?”
यही समस्या थी।
10. Dyarchy की प्रमुख समस्याएँ
❌ 1. Power और Responsibility अलग-अलग थी
भारतीय Ministers को कुछ departments की responsibility दी गई, लेकिन बहुत महत्वपूर्ण powers Reserved side में थीं।
इससे responsibility निभाना कठिन हो जाता था।
❌ 2. Reserved Subjects सबसे महत्वपूर्ण थे
Police, Finance और Law and Order जैसे महत्वपूर्ण विषय Governor और Executive Council के पास रहे।
इसलिए भारतीय Ministers के पास शासन की पूरी शक्ति नहीं थी।
❌ 3. Administration में Confusion
एक ही Provincial Government में दो हिस्से थे।
एक तरफ Governor और Executive Council।
दूसरी तरफ Indian Ministers।
इससे कई बार coordination की समस्या पैदा हो सकती थी।
एक department की policy दूसरे department से जुड़ी होती थी।
लेकिन दोनों पर अलग-अलग authorities का control था।
❌ 4. Governor बहुत powerful था
Governor की position मजबूत थी।
इस कारण Ministers की autonomy सीमित रही।
भारतीयों को जिम्मेदारी मिली, लेकिन अंतिम constitutional control अभी भी ब्रिटिश व्यवस्था में मजबूत था।
❌ 5. जनता की अपेक्षाएँ और वास्तविक शक्ति अलग थीं
भारतीयों को लगा कि उन्हें शासन में भाग लेने का मौका मिला है।
लेकिन जब उन्हें पता चला कि सबसे महत्वपूर्ण departments अभी भी Reserved हैं, तो उन्हें लगा कि—
“हमें जिम्मेदारी तो दी गई है, लेकिन पूरी power नहीं।”
11. फिर भी Dyarchy महत्वपूर्ण क्यों थी?
इतनी समस्याओं के बावजूद Dyarchy को केवल failure समझना सही नहीं होगा।
क्योंकि पहली बार Provincial level पर भारतीयों को कुछ departments की वास्तविक administrative responsibility मिली।
भारतीय नेताओं और मंत्रियों को administration का practical experience मिला।
Legislative politics और executive responsibility के बीच संबंध विकसित हुआ।
यानी यह व्यवस्था imperfect थी, लेकिन इसने भारतीयों को आगे आने वाली responsible government की दिशा में एक महत्वपूर्ण अनुभव दिया।
इसे ऐसे समझिए—
यह मंजिल नहीं थी, लेकिन मंजिल की तरफ जाने वाली सीढ़ी जरूर थी।
12. 1919 की Dyarchy vs 1935 की व्यवस्था
अब सबसे important comparison।
1935 में Government of India Act, 1935 आया।
इस Act ने Provincial Government के मामले में 1919 की Dyarchy को पूरी तरह बदल दिया।
1919 में क्या था?
Dyarchy in Provinces
यानी:
Reserved + Transferred
एक ही Province में दो प्रकार का control।
1935 में क्या हुआ?
Provincial Autonomy की व्यवस्था लाई गई।
यानी Provinces को पहले की तुलना में अधिक स्वतंत्रता और responsible government की दिशा में ज्यादा स्पष्ट constitutional position मिली।
सबसे महत्वपूर्ण बात—
1935 Act ने Provinces में Dyarchy को समाप्त कर दिया।
अब Provincial level पर Reserved और Transferred Subjects वाला 1919 का division नहीं रहा।
🧠 1919 vs 1935 — एक नजर में
| आधार | 1919 | 1935 |
|---|---|---|
| Provincial System | Dyarchy | Provincial Autonomy |
| Subjects | Reserved + Transferred | ऐसा द्विभाजन समाप्त |
| Indian Ministers | केवल Transferred Subjects | Provincial Government में अधिक व्यापक जिम्मेदारी |
| Governor | बहुत मजबूत position | महत्वपूर्ण discretionary/special powers फिर भी रहीं |
| Responsible Government | सीमित | अधिक विकसित रूप |
| मुख्य पहचान | Dyarchy | Provincial Autonomy |
🔥 सबसे आसान Memory Trick
1919 = Province में Power बाँटी गई।
1935 = Province को ज्यादा Autonomy दी गई।
या सिर्फ इतना याद रखिए:
1919 → Dyarchy
1935 → Provincial Autonomy
🎯 CLAT के लिए 7 सबसे जरूरी बातें
अगर इस पूरे topic को exam से पहले 30 seconds में revise करना हो, तो ये 7 points याद रखें:
1. Dyarchy → Government of India Act, 1919
2. Dyarchy केवल Provinces में लागू की गई थी।
3. Subjects → Reserved + Transferred
4. Reserved → Governor + Executive Council
5. Transferred → Indian Ministers
6. Police, Finance, Law and Order जैसे महत्वपूर्ण विषय Reserved side में रहे।
7. Government of India Act, 1935 → Provincial Dyarchy समाप्त + Provincial Autonomy।
❤️ पूरी कहानी एक बार फिर
1909 में भारतीयों को Legislative Councils में ज्यादा representation मिला।
लेकिन भारतीयों ने कहा—
“हमें केवल बोलने और बैठने की जगह नहीं चाहिए, हमें शासन की जिम्मेदारी चाहिए।”
1919 में अंग्रेजों ने जवाब दिया—
“ठीक है, कुछ जिम्मेदारी लो।”
लेकिन उन्होंने साथ में कहा—
“महत्वपूर्ण departments हम अपने पास रखेंगे।”
इसलिए Provincial Government दो हिस्सों में बंट गई—
🔴 Reserved → Governor और Executive Council
🟢 Transferred → Indian Ministers
यही थी Dyarchy।
भारतीयों को पहली बार शासन चलाने का कुछ practical experience मिला, लेकिन व्यवस्था में एक बड़ी contradiction थी—
जिम्मेदारी भारतीयों की बढ़ रही थी, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण power अभी भी अंग्रेजों के पास थी।
इसी कारण Dyarchy ज्यादा सफल नहीं हो सकी।
फिर 1935 में कहानी ने एक और मोड़ लिया।
Provincial Dyarchy समाप्त हुई और Provincial Autonomy की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया।
इसलिए भारतीय constitutional development की कहानी में Dyarchy को ऐसे याद रखिए—
“1919 ने भारतीयों को Provincial Government में जिम्मेदारी का स्वाद चखाया, लेकिन 1935 ने उन्हें उससे आगे बढ़ाकर Provincial Autonomy की ओर पहुँचाया।”
यही Dyarchy in Provinces की पूरी कहानी है।